Kya Yaad Hai Aapko Lyrics In Hindi : Afreen Khan #Metoo

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Kya Yaad Hai Aapko Lyrics In Hindi : Afreen Khan #Metoo : Hello Guyz आज मै आपको #Metoo campaign से Related एक बहुत famous हुई Story जिसे Tape a Tale पर Afreen Khan ने Share किया , Afreen Khan की यह कविता Kya Yaad Hai Aapko आपको नाम से बहुत ज्यादा Famous हुई , इस Hindi Story में sexual abuse के बारे में बताया गया है कि आखिर एक लड़की को कितना Sexual Harassment से जूझना पड़ता है , अपनी बात को लोगो के सामने बेबाकी से रखने के “Bharat Ki Shan Team” Afreen Khan के जज्बे को सलाम करती है !

क्या याद है आपको लिरिक्स : अफरीन खान 

दोस्‍तों “Bharat Ki Shan” ब्‍लाग पर आपका स्‍वागत है। आज हम आपके लिए “Afreen Khan”की “Kya Yaad Hai Aapko?” का Lyric  लेकर आए है। जो समाज मे व्‍याप्‍त बुराई पर एक heart touching story Lyrics है। जिसे Youtube पर काफी पसन्‍द किया गया है।

Kya Yaad Hai Aapko Lyrics In Hindi : Afreen Khan #Metoo

सलाम आलेकुम अब्‍बा, कैसे है आप।

क्‍या हुआ पहचाने नहीं मै आपकी बेटी आलिया। कुछ याद आया कुछ साल पहले तक आप अपने जायद बीबी-बच्‍चों से फुर्सत लिए हम मां-बेटी के गरीबखाने चक्‍कर लगाने आ जाया करते थे। मेरे लिए गुब्‍बारे खरीदने की फुर्सत नहीं थी शायद आपको इसलिए दो-चार रूपये पकड़ाकर अपने बाप होने का फर्ज आप शायद आफरीन पूरा कर देते थे। नहीं क्‍या याद है आपको कि अक्‍सर अम्‍मी को कहा करते थे कि इसका नाम आफरीन गलत रख दिया है तुमने। इसका नाम तो आलिया होना चाहिए था। मगरूरत देखी है इस छोटंकी की, हैं और जब मैं फटर-फटर अंग्रेजी में पड़ोसियों से बात कर रही होती थी तो कैसे आप अपने मसखरे अंदाज़ में मुझे चिढ़ाते हुए कहते थे कि- I walk in English, I talk in English, I laugh in English because English is very funny language.

और मै हर बार उतनी ही जोर से हंसती थी पता है अब्‍बा क्‍यों, क्‍योंकि आप हीरो थे मेरे। क्‍या याद है आपको कि कैसे तलाक, तलाक, तलाक बोल हल्‍के से आप इस बेबुनियादी रिश्‍ते से निकल गये थे और अम्‍मी ने भी नई शादी कर ली थी। नये अब्‍बा बड़े अच्‍छे थे मुझे रोज चाकलेट्स देते थे अम्‍मी को भी बहुत खुश रखते थे पर मैं दिल ही दिल आपको रोज याद करती थी। अब्‍बा पता है क्‍यों, क्‍योंकि आप हीरो थे मेरे यकीन था मुझे कि ख्‍वाब में भी याद करूंगी न तो फट से आ जायेंगे आप मेरे पास। पर हुआ कुछ यूं कि बुढ़ापे में याददाश्‍त कमजोर होने वाले फिकरे को बड़ा ही सीरियसली ले लिया था आपने।

खैर ये सब तो पुरानी बाते है, पर क्‍या याद है आपको वो रात जिस रात अम्‍मी ने मुझे नये अब्‍बा के साथ अकेला छोड़ लखनऊ किसी काम से चली गयी थी और मैं सो रही थी अपने कमरे में मच्‍छरदानी के अन्‍दर। आपको तो पता है न मच्‍छर बर्दाश्‍त नहीं होते मुझसे। पर क्‍या याद है आपको कैसे मुझे घर में अकेला पाकर वो हल्‍के से मच्‍छरदानी उठाकर मेरे बिस्‍तर में घुस गया था। मै सो रही थी अब्‍बा सच में अचानक से कुछ महसूस हुआ मुझे एक हाथ मेरे कमर पर था और दूसरा हाथ मेरे बालो में वो अपने भद्दे होठों से मेरे जिस्‍म पर कुछ कर रहा था।

मानो सूंघ रहा था अपने नये शिकार को। उसकी लम्‍बी अंगुलियां उन जोंक की तरह थी जो हट जाने के बाद भी अपने निशान छोड़ जाती है। अले मेरा बच्‍चा एक दफा लगा आप है ख्‍वाब से निकलकर मेरे पास। पर क्‍या याद है, आपको मेरी आंख खुल गयी थी और वो आप नहीं थे नये वाले अब्बा थे वो आहिस्‍ता-2 मेरी सलवार सरका रहे थे और जो गहराईयां तब तफ्सील सी गहरी हुई भी नहीं थी उन गहराईयों में अपनी जोंक वाली अंगुलियों से रास्‍ता बना रहे थे। क्‍या याद है आपको मुझे होश आ चुका था और मैं उन्‍हें धक्‍का दे रही थी नहीं क्‍या कर रहे हैं आप। नहीं प्‍लीज मैं अम्‍मी को बता दूंगी देखिये क्‍या कर रहे है आप। प्‍लीज मैं अम्‍मी को बता दूंगी।

एक मिनट मैं अम्‍मी को बता दूंगी ऐसा क्‍यों कहा था मैंने। मेरा दिल तो चीख-चीख कर सिर्फ आप को पुकार रहा था अब्‍बा, अब्‍बा, अब्‍बा तभी मेरा दिमाग मुझे चाटा मारता और मेरी जुबान चिल्‍लाती अम्‍मा अम्‍मा। क्‍या सुनाई दिया था आपको नहीं क्‍या कर रहे हैं आप नहीं प्‍लीज आह दर्द, दर्द हो रही प्‍लीज मत करिये, नहीं अम्‍मी अब्‍बा अब्‍बा प्‍लीज नहीं तभी फिर मेरा दिमाग मुझे चाटा मारता और मेरी जु़बान चिल्‍लाती अम्‍मा अम्‍मा। क्‍या उस तबदीलियत की आवाज आई थी आपको। कैसे एक ही रात में अम्‍मी को अम्‍मा बना दिया था मैंने क्‍यों‍कि अब्‍बा का काम भी अब्‍बू नहीं करना था फट लात मारकर भागी थी मैं और दूसरे कमरे में खुद को बंद कर लिया था मैंने और शायद आज तक उसी कमरे में बंद हूँ मैं।

कुछ पैदा हुआ था उस दिन क्‍या अहसास हुआ था आपको नफरत ने हल्‍के से दस्‍तक दी थी उस दिन । एक दिल टूटा था उस दिन क्‍या भनक पड़ी थी आपको। एक ग्‍यारह साल की लड़की तबाह हुई थी उस दिन क्‍या खबर आई थी आपको वो लड़की उसी कमरे में बंद दो दिन तक रो रही थी क्‍या आवाज आई थी आपको । एक सेकेंण्‍ड, एक सेकेंण्‍ड, एक सेकेण्‍ड आवाज आती भी तो कैसे वो लड़की रोई ही नहीं थी वो न तब रोई थी और वो न आज रोई है और न ही कल रोयेगी क्‍योंकि वो लड़की आलिया थी आपकी आलिया आपकी नाजायज औलाद क्‍या याद भी है वो आलिया आपको भला कैसे होगी वो आलिया मर जो चुकी है खबर लगी थी कि आपकी तबियत ठीक नहीं है तो सोचा की खत लिख दूं मगर लगता है ,कि बाकी सारे खतों की तरह ये भी अपना वजूद उस दराज में पाएगा अपना ध्‍यान रखियेगा अब्‍बा।

खुदा हाफिज़।

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