जन्माष्टमी पर भाषण : Krishna Janmashtami Speech In Hindi

जन्माष्टमी पर भाषण : Krishna Janmashtami Speech In Hindi : दोस्तों आज मै आपको Shri Krishna janmastami पर निबंध के बारे में पूरी जानकारी देने वाली हूँ|साथ ही साथ आपको और भी कई Topic पर जानकारी मिलेगी जो इस प्रकार है :-Essay on lord Krishna Life In Hindi, Krishna Janmashtami In Hindi Wikipedia, Janmashtami In Hindi Essay ,Janmashtami Nibandh, 10 Lines on lord Krishna In Hindi.

Krishna Janmashtami Speech In Hindi:-

श्री कृष्ण हिन्दू धर्म के पूजनीय भगवान है हिंदूओ के मान्यतानुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद की कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्रि 12:00 बजे कंश की जेल मथुरा में हुआ था| इनके पिता का नाम वसुदेव तथा माता का नाम देवकी था कंस  अपनी बहन देवकी को अत्यधिक प्रेम करता था| उसने अपनी बहन का विवाह अपने प्रिय मित्र वसुदेव के साथ धूमधाम से कर दिया|वह अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल भेजने के लिए स्वयं रथ लेकर जा रहा था|

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वह कुछ दूर ही रथ लेकर चलाया कि आकाशवाणी हुई – कि हे कंश जिस बहन देवकी को बड़े उल्लास के साथ ले जा रहा है उसी के आठवे पुत्र के द्वारा तू मारा जायेगा कंश आकाश वाणी सुन कर अपने प्रिय बहन देवकी को अपनी तलवार से जान से मारने के लिए उद्दत हुआ| तभी वासुदेव ने कंस को रोकते हुए निवेदन किया कि देवकी आपकी बहन और अबला है इसे जान से न मार कर कोई अन्य दंड दे दे| तब कंस ने बहनोई वसुदेव और प्रिय बहन देवकी को मथुरा की जाल में डाल दिया और उसने पहरेदार को सावधान किया कि जब देवकी के आठवा पुत्र हो तो उसे मुझे सौप दिया जाएं |

इसी बीच नारद मुनि एक दिन कंस के दरबार में एक कमल का फूल लेकर पधारे| कंस ने नारद को प्रणाम कर उन्हें आसन दिया और दरबार में आने का कारण पूछा तो नारद ने कहा कि राजन कंस यह कमल के पुष्प को देख रहे हो बताएं इसमें कौन सी पंखुड़ी पहली है और कौन सी आठवी है अर्थात राजन जिसप्रकार इस कमल के पुष्प की प्रत्येक पंखुड़ी पहली और आठवी हो सकती है उसी प्रकार देवकी की कोई भी संतान आठवी हो सकती है| इस घटना के बाद कंस ने देवकी की सभी संतानों का वध करने का निश्चय किया और एक एक करके देवकी और वसुदेव के आँखों के सामने ही उनके छः पुत्रो का वध कर दिया जिससे देवकी और वासुदेव को अपार दुःख और कष्ट हुआ| जेल में रहते हुए अनेक प्रकार की यातनाएँ झेलनी पड़ी| देवकी के सातवे गर्भ को ईश्वर की कृपा से रोहिणी के गर्भ के रूप में स्थापित हुआ रोहिणी ने हलधर बलराम को जन्म दिया|

और देवकी के सातवे गर्भ के गर्भपात की सूचना दी गयी अंत मे देवकी के आठवे पुत्र अर्थात भगवान कृष्ण का जन्म कंस की जेल में भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी की रात्रि 12:00 बजे अर्थात अर्धरात्रि को हुआ श्री कृष्ण का जन्म होते ही वसुदेव और देवकी बेड़ियाँ टूट गयी और जेल के सभी फाटक स्वयं खुल गए और पहरेदार द्वार पर गिर कर गहरी नीदं में सो गए|तभी वसुदेव को आकाशवाणी से सन्देश मिला कि पुत्र श्री कृष्ण को यमुना पार गोकुल में नन्द और यशोदा घर छोड़ आओ और उनकी नवजात कन्या को वापस कंस की जेल में ले आओ|

वसुदेव ईश्वरीय निर्देश का पालन करते हुए अपने पुत्र श्री कृष्ण को सूप में लिटाकर भादों माह की घनघोर अंधेरी आधी रात को यमुना पार करने लगे| यमुना की गहराई और उसकी तेज धार ने वासुदेव का दिल दहला दिया परन्तु भगवान कृष्ण ने अपने पैर सूप से लटका दिया और यमुना जी श्रीकृष्ण के पैर का स्पर्श पाकर घटने लगी और वसुदेव यमुना पार करके गोकुल में नन्द और यशोदा के घर पहुचे| यशोदा के पास अपने पुत्र कृष्ण को लिटा दिया और कन्या को गोद में उठाकर वापस कंस की जेल मथुरा वापस आ गए|

वसुदेव के जेल वापस आते ही उनकी बेड़ियाँ फिर लग गयी और सभी फाटक खट खट करके बंद हो गए और पहरेदार जग गए कन्या के रोने की आवाज सुनकर पहरेदारों ने कंस को सूचना दी कि देवकी ने आठवी संतान के रूप में एक कन्या को जन्म दिया है| सूचना पाकर कंस नग्न तलवार लेकर जेल में देवकी के सम्मुख पहुचा तो देवकी ने कंस से निवेदन किया कि भैया यह एक कन्या है अतः इसका वध न करे परन्तु कंस कहाँ मानने वाला था उसने झट से देवकी के हाथ से कन्या को जबरदस्ती ले लिया और जैसे ही उसे पत्थर पर पटक कर मारना चाहा उसी क्षण कन्या हाथ से छूट गयी और आकाशमार्ग से यह कहते हुए अदृश्य हो गयी कि हे कंस तू मुझे क्या मारेगा तुझे मारने वाला गोकुल में पैदा हो चुका है|

इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओ के साथ जन्म लिया| और अपनी अनोखी और अदभुत बाल लीलाओं के साथ अनेक राक्षसों का वध किया| तभी से अबतक हम सभी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रीकृष्ण जन्मास्टमी के रूप में मनाते आ रहे है| इस दिन हिन्दू लोग व्रत रखते है और साथ ही मंदिर सजाते है| भजन कीर्तन के साथ रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते है| श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन गोकुल ,वृदावन और मथुरा में विशेस आयोजन किये जाते है सम्पूर्ण भारत में यह पर्व हर्षौल्लास के साथ में मनाया जाता है| विदेशो में भी इस पर्व को आनंदपूर्वक मनाया जाता है |

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