Dosti Ka Breakup : Helly Shah Story Lyrics In Hindi

Dosti Ka Breakup : Helly Shah Story Lyrics In Hindi

हैलो दोस्‍तों, आज आपको Helly Shah की Dosti ka breakup आपसे शेयर कर रहा हूं। इस पोस्‍ट में Helly Shah ने दोस्‍ती के प्‍यारे से अहसास को बताया है आपसे वह दोस्‍त अचानक से सारे रिश्‍ते खत्‍म कर दे तो कितना दर्द होता है उसके बारे में बहुत सुंदर ढ़ंगेे से बताने का प्रयास किया  है। इसे Youtube पर लोगों ने काफी पसंद किया है।

एक रोज मुझे मेरे दोस्‍त ने फोन लगाया। फोन उठाते ही वो मुझ पर चिल्‍लाने लगी तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो तुम होती कौन हो। मुझे आज के बाद तुम्‍हारी शक्‍ल तक नहीं देखनी। हाय दोस्‍तो मेरा नाम है हेली मै हूं माधवी की सबसे अच्‍छी दोस्‍त Best friend कितना अजीब होता है न तुम इन करोड़ो की भीड़ मे अपनी छोटी सी जिन्‍दगी में कुछ हजारों लोगो से मिलते हो। इन हजारों लोगों में से कुछ सौ लोग तुम्‍हारी जि़न्‍दगी की किताब पर पन्‍ने बनकर रह जाते है। और इन सौ चुनिंदा लोगों में से तुम चुनते हो एक सबसे प्‍यारा इंसान To call her your Best Friend. मगर ये क्‍या झोल है अगर Best friend है तो रोज सुबह कालेज के लिए उठाओ, exam से पहले उसे पूरा syllabus पढ़ाओ, किसी से झगड़ के आए तो मन हल्‍का करो रोए तो आंसू पोछो, हंसे तो खुशी मनाओ। उसकी जिंदगी के हर एक लम्‍हे को खूबसूरत बनाना तुम्‍हारी जि़ंदगी का मक्‍सद सा बन जाता है। क्‍यूं भला, अरे वो तुम्‍हारी Best friend जो ठहरी। मगर रिश्‍ते अक्‍सर प्‍यार और भरोसे से बने एक नाजुक पुल पर से गुजरते है। मैने और माधवी ने भी अपनी दोस्‍ती का एक ऐसा ही पुल बनाया। नाके वाले रामू भईया की आइसक्रीम, लेक्‍चर मे पास की गई वो चिट्ठियां, रात को चुपके से निकलकर दो बजे वाली वो लांग ड्राइव, कभी मौका मिल जाये तो अंकल के फ्रिज से चुराई हुई कड़वी सी बियर जो हम दोनो शेयर किया करते थे। कुछ ऐसे ही हमने हमारे पुल की नींव सींची थी। मगर रिश्‍ते की सड़क पर नफरत की बारिश का ऐसा कहर बरसा की राश्‍ते के बीचोबीच उजड़े हुए कंकड़ दरार छोड़ गए। मुझे आज भी याद है वो दिन जब माधवी ने मुझे देखकर अपनी नजरे फेर ली थी। मैने सोंचा चलो, आज फिर देखने को मिलेगा माधवी साहिबा का एक और ड्रामा लेकिन माधवी तो फिर कभी दिखी नहीं। 14 Ignored messages, 13 Missed calls, 3 accidental meetings, और वो चार ओप्‍पो इस्‍माइल्‍स, वो दो झूठ के बाद। मेरी दिल की अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि कुछ तो गड़बड़ है। आर्डर आर्डर माधवी को फोन लगाया जाय। लेकिन माधवी ने फोन नहीं उठाया। जब उठाया तो ये कहने के लिए कि मेरे पास अभी वक्‍त नहीं है मैं तुमसे बाद मे बात करूंगी। वक्‍त

दोस्‍तो, वक्‍त से बड़ा गिरगिट मैंने आज तक नहीं देखा कभी किसी का अच्‍छा तो कभी बुरा। वक्‍त इतनी तेजी से रंग बदलता है कि बीते हुए और आने वाले के बीच का फर्क परखना मुश्किल हो जाता है। मेरे ख्‍याल में अगर वक्‍त को समझ पाया है तो वही जिसका सारा वक्‍त खतम हो गया हो। खैर, न कभी माधवी को वक्‍त मिला और न मुझे माधवी। मिला तो बस एक जवाब मुझे तुम्‍हारे साथ वक्‍त बिताना पसंद नहीं तुम बदल गयी हो। वाह फिर से मेरी दो पल की जि़ंदगी के चार टुकड़े करने चला आया था वक्‍त। मेरे अंदर के बदलाव को समझना इतना मुश्किल हो गया था कि माधवी की कही हुई हर बात उस बियर से भी कड़वी लग रही थी साली गले से उतर ही नहीं रही थी। बस फिर क्‍या था रात को आंसू और दिन मे दिलासा यही बन गयी थी मेरी जिंदगी। रोज माधवी को अपने नये दोस्‍तो के साथ वक्‍त बिताते हंसते-मुस्‍कुराते देख मेरे मन में तो बस एक ही ख्‍याल आता था कि मैं भी कभी उसे ऐसे हंसाया करती थी। कभी वो भी मेरे लिए अपना वक्‍त जाया करती थी। लेकिन दोस्‍तों ये इंसान उसूलो का पुतला तो नहीं इरादे चाहे कितने भी नेक क्‍यूं न हो अगर उन्‍हें जताने का तरीका सही नहीं तो खुदा भी अजान को आदत समझ लेता है।

दिल तो मेरा साफ था लेकिन शायद मेरे शब्‍द मैले थे, मन तो मेरा नादान था लेकिन वक्‍त के मन मे खोट थी सोंचा अच्‍छा किया बुरा। अरे चोट लगी थी मुझे खून निकल रहा था टूटे हुए दोस्‍ताने की तपती हुई धूप मे मेरे वादो का बदन जल रहा था। लेकिन दोस्‍तो सच कहूं तो कोई गिले सिकवे नहीं क्‍योंकि जब नाते रूख बदलते है ना तो हजारो माफिया भी गलतियों के सामने कम पड़ जाती है। और जब इंसान रूख बदलता है तो हजारो यादे भी उस बदलाव के सामने कम ही पड़ जाती है। शायद इसीलिये अब मुझे कोई गिले सिकवे नहीं। और वैसे भी वो फोन पर ऐसे ही थोड़ी न चिल्‍लायी थी कि मैं होती कौन हूं उसी वक्‍त मुझे अहसास हो गया था कि मै कोई नहीं होती। उसकी जिंदगी में इस वक्‍त और आने वाले हर वक्‍त में अब मै कोई नहीं होती।

दोस्‍तो, अगर इस कहानी से अपने साथ कुछ ले जा सकते तो बस ये:- कि

‘’इरादे बदल जाते है लब्‍ज बदल जाते है, रिश्‍ते बदल जाते है खुदा भी बदल जाता है।

जब इंसान का वक्‍त बदलता है ना तो इंसान खुद भी बदल जाता है।‘’

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