Chanakya Neeti On Time & Nature In Hindi | चाणक्य नीति : समय और प्रकृति पर कथन 

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Chankya Neeti on TIME & NATURE In Hindi
Chankya Neeti on TIME & NATURE In Hindi

Chanakya Neeti On Time & Nature In Hindi | चाणक्य नीति : समय और प्रकृति पर कथन 

Chanakya Neeti On Time & Nature In Hindi : आज हम आपसे Chankya Neeti में Time & Nature [समय और प्रकृति] पर कहे गए सभी श्लोंको का hindi में अर्थ बतायेंगे | Chankya के बताये गए ये नियम आपके लिए रामबाण सिद्ध होंगे |

Hy Friends , आज हम आपसे Chanakya Neeti को Hindi Language में Share करने जा रहे हैं | Chankya ने अपनी Chankya Neeti में Love, [Dushman],Student,Life,Woman,Dharma,Knoweldge आदि Topics को बहुत ही अच्छी प्रकार से हमें बताने की कोशिश की है , अगर हम चाणक्य की नीतियों का पालन करे तो हमारे सफल होने की सम्भावना बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है , क्योंकि इन्ही नीतियों के कारण चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद को पराजित किया था | चाणक्य ने इन नीतियों का संस्कृत भाषा ने वर्णन किया है जिसका HINDI रूपान्तरण हम यहाँ आपको उपलब्ध करा रहे हैं तो चलिए पढ़ते हैं :Chanakya Neeti Time & Nature In Hindi

Chanakya Neeti In Hindi :Time & Nature

  • संसार में कुछ वस्‍तुएं ऐसी हैं, जो रगड़ने और दबाने के बिना अपना सही आनन्‍द नहीं देती जैसे कि- मेंहदी, जब तक इसे रगड़ा न  जाए यह  रंग नहीं देगी।
  • ईख  को जब  तक पेला न जाए, तब तक उसका रस नहीं निकलता और तब तक गुड़ व चीनी तैयार नहीं हो सकती। होती।
  • धरती पर जब तक अच्‍छी तरह हल न चलाया जाए तब तक अच्‍छी फसल नहीं होती।
  • ठीक उसी प्रकार से जब  तक नाल के  साथ ऐसा व्‍यवहार न   किया  जाएं तो  उसका रंग निखरता ही नहीं।
  • भंवरा  जब तक कमल दल के  बीच रहता है, तब तक ही कमल के फूल का आनन्‍द लेता है।
  • किन्‍तु संयोग की बात है कि परदेश में तौदिए का फूल ही उसके लिए बहुत होता है।
  • इसी तरह भूखे रहने से थोड़ा सा  भोजन करना भी अच्‍छा होता है, इससे कुछ न कुछ  तो आसरा  मिलता है।
  • प्राणी को जैसा भी समय के अनुसार मिले, वैसा ही उसे  कर  लेना चाहिए।
  • चन्‍दन का पेड़ कट जाने से उसकी  खुशबू  समाप्‍त नहीं हो जाती।
  • हा‍थी बूढ़ा होने पर भी चंचल रहता है।
  • ईख कोल्‍हू में पीसे जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता।
  • सोना आग में डालने के पश्‍चात भी अपनी चमक नहीं खोता, इसी प्रकार से अच्‍छे खानदानी लोग कहीं भी चले जाए वे  अपने गुणों को नहीं छोड़ते। गुण और उनकी अच्‍छाई सदा   ही उनके साथ रहती है।
  • इस  धरती  पर कौन ऐसा है, जिसे धन पाकर गर्व न हुआ हो ?
  • ऐसा कौन प्राणी है, जिसे नारी ने व्‍याकुल न किया हो ?
  • कौन मौत के पंजे से बच पाया है ?
  • कौन ऐसा है, जो बुराई  के जाल में न फंसा हो ?
  • कौन ऐसा है, जो मजेदार खानों को देखकर मुंह में पानी न भर आया हो ?
  • सच तो यह है कि हम सब हमाम में नंगे है।
  • सांप के दांत में जहर होता है।
  • मक्‍खी के सिर में और बिच्‍छू की  दुम में जहर होता है। परन्‍तु बुरे इंसान के तो पूरे शरीर  में  जहर होता है।
  • बुरा  प्राणी सबसे अधिक जहरीला होता है।
  • पहले क्‍या किसी ने सोने का मृग देखा  था।
  • कभी नहीं, फिर सीता जी ने देखा था, रामजी ने उसी हिरण  का  पीछा किया, इसके फलस्‍वरूप सीता-हरण भी हुआ। ऐसा इसलिए हुआ कि विनाश-काल आना था तभी तो कर काम का उल्‍टा होता चला गया। इसीलिए कहा गया है-
  • विनाश के दिन जब आते हैं तो बुद्धि भ्रष्‍ट हो जाती है। शक्ति जिसमें नही, वह साधु बन जाता है।
  • जिसके पास  धन न हो, वह ब्रह्मचारी बनता है।
  • बूढ़ी औरत सबसे अधिक पतिव्रता बनती है।
  • यह सब के सब ढोंगी होते है जैसे कि कभी ताकतवर साधू नहीं बनता, धनवान ब्रह्मचारी नहीं बनता, सेहतमंद आदमी  भक्ति नहीं  करता, सुंदर नारी पतिव्रता धर्म के गुण कम ही गाती है।
  • मन में श्रद्धा हो तो घर में ही गंगा है।
  • इसी  कारण लोभी को दूसरे के दोषों से क्‍या लेना।
  • चुगलखोर को दूसरे के पापों से क्‍या लेना।
  • मन यदि शुद्ध हो ज्ञानी हो तो दूसरों के गुणों से क्‍या लेना।
  • गुण की सब स्‍थानों पर पूजा होती है, धन की पूजा नहीं।
  • पूर्णिमा के चांद को सब लोग पूजते हैं, किन्‍तु दूज का  दुर्लभ चांद कहीं नहीं पूजा जाता।
  • गुणवान की प्रशंसा तो सभी  लोग करते हैं, किन्‍तु गुणवान यदि अपने मुंह से स्‍वयं प्रशंसा करे तो अच्‍छा  नहीं लगता।
  • गुण  समझदार आदमी के पास जाकर निखर  जाते  है।
  • हीरे-मोती की कीमत वे क्‍या जानें, रत्‍न तो शीश  में जड़  जाने के पश्‍चात ही चमकता है। मणि क्‍या तभी शोभा देती  है,  जब उसे सोने में जड़ा  जाए।
  • प्राणी की  चार चीजों  की भूख कभी नहीं मिटती, धन, जीवन,  वासना और भोजन। सबके लिए  हर मनुष्‍य सदा भूखा रहता है। भले  ही उसे यह  चीजें जितनी भी मिल जायें  लेकिन उस  की लालसा नहीं मिटती।
  • अन्‍न से बढ़कर कोई दान नहीं। द्वादशी  से  बढ़कर कोई  तिथि नहीं। कोई गायत्री मंत्र से बढ़कर नहीं। कोई देवता, मां-बाप से  बढ़कर नहीं।
  • यह  एक  सत्‍य है।
  • राजा, वैश्‍या, यमराज, आग, चोर, बालक, याचक, झगड़ा   करने  वाला, यह आठों ऐसे हैं जो दूसरों  के दु:ख-सुख का कारण बनते हैं।
  • कांचली में  सांप रहते है, कीचड़ में कमल के फूल खिलते हैं, केवल अपने एक ही  गुण के कारण कमल का फूल पूजा जाता है। इसीलिए प्राणी अपने ही गुणों से उंचा उठ सकता है।
  • बिना गुण के केवल पुस्‍तकें के सहारे ज्ञान प्राप्‍त करने वाला प्राणी बिल्‍कुल उस औरत की भांति है, जो बिना पति के सन्‍तान पैदा करने की आशा रखती है।
  • औरत ताकत को कम  करके अपनी  ओर खींचती है।
  • दूध शक्ति बढ़ाता है।
  • प्रकृति ने प्राणी के लिए हर चीज बनाई है। उनका उपयोग  अच्‍छाई अथवा बुराई के लिए किया जाए यह निर्णय केवल इन्‍सान का फर्ज है।
  • गाय कुछ भी खाती है परंतु दूध देती है। इसी दूध से बढि़या से बढि़या पदा‍र्थ बनते है।
  • इसी तरह  से बुद्धिमान प्राणी कुछ भी करें, उनका ज्ञान कभी कम नहीं होता। बुद्धिमान की एक-एक बात कीमती होती है, बस उसके समझने का कष्‍ट करें।
  • इस संसार में बहुत कम लोग ऐसे मिलेंगे जो बाहर अन्‍दर से एक हों।
  • हर आदमी के बाहर और अन्‍दर में अन्‍तर होता है।
  • बाहर से भला, अन्‍दर से बुरा आदमी सदा ही चेहरे लगता है।
  • जैसे हाथी दांत खाने के और दिखाने के और होते है।
  • महापुरूषों के गुण देखों उनका काम नहीं।
  • हर महापुरूषों में कोई न कोई तो बुराई  होती है।
  • श्री कृष्‍ण जी राम लीला करते है।
  • अर्जुन औरत लाए थे।
  • राजा शांतनु धीवर कन्‍या पर मोहित हो गए थे। यह बात याद रखो कोई भी महापुरूष अवगुण के बिना नहीं होता।
  • पागल, कुंवारी  लड़की, कोढ़ी, गुड़ चंडाल और कनफरे साधु इन सबको ही दूर से ही नमस्‍कार करो। इनका साथ बहुत बुरा होता है।
  • भाग्‍य में जो लिखा है, वह कार्य होकर रहेगा। कर्म  और परिश्रम से ही फल मिलता है।
  • यदि आम खाना आपके नसीब में लिखा है तो क्‍या आम के पेड़ के नीचे मुंह खोलकर लेटने से मुंह में आम आकर गिर जायेगा।
  • ऐसा  नहीं हो सकता, उसके लिए तो परिश्रम तो करना ही पड़ेगा, केवल भाग्‍य के सहारे रहने वाले लोगों ने तो ईश्‍वर को   बदनाम  कर रखा है।
  • तेल में पानी नहीं मिलता है।
  • घी में से जल नहीं निकलता।
  • पारा किसी से नहीं मिल सकता।
  • इसी प्रकार विपरीत स्‍वभाव वाले, एक दूसरे से कभी नहीं मिल सकते।
  • समय न तो किसी के रोकने से रूकता है। समय अपनी गति से चलता रहता है, समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता  इसीलिए समय की  कीमत को समझें, गुजरा समय कभी वापस नहीं आता, सदा इन्‍सान की समय की  प्रतीक्षा  करता है।
  • समय का कोई मूल्‍य नहीं है, इससे लाभ उठाने वालेही आगे बढ़ते है।

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