Chanakya Neeti On Woman In Hindi | चाणक्य नीति : स्त्री पर कथन

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Chankya Neeti on Woman In Hindi
Chankya Neeti on Woman In Hindi

Chanakya Neeti On Woman In Hindi | चाणक्य नीति : स्त्री पर कथन

Chanakya Neeti On Woman In Hindi : आज हम आपसे Chankya Neeti में Woman [स्त्री] पर कहे गए सभी श्लोंको का hindi में अर्थ बतायेंगे | Chankya के बताये गए ये नियम आपके लिए रामबाण सिद्ध होंगे |

Hy Friends , आज हम आपसे Chanakya Neeti को Hindi Language में Share करने जा रहे हैं | Chankya ने अपनी Chankya Neeti में Love, [Dushman],Student,Life,Woman,Dharma,Knoweldge आदि Topics को बहुत ही अच्छी प्रकार से हमें बताने की कोशिश की है , अगर हम चाणक्य की नीतियों का पालन करे तो हमारे सफल होने की सम्भावना बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है , क्योंकि इन्ही नीतियों के कारण चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद को पराजित किया था | चाणक्य ने इन नीतियों का संस्कृत भाषा ने वर्णन किया है जिसका HINDI रूपान्तरण हम यहाँ आपको उपलब्ध करा रहे हैं तो चलिए पढ़ते हैं :Chanakya Neeti Woman In Hindi

Chanakya Neeti In Hindi : Woman

  • एक छोटे से साधारण पहाड़ को ऊंगली पर उठा लेने के कारण ही तो श्री भगवान को गोवर्धनधारी कहा गया।
  • किन्‍तु स्‍वयं तीनों लोकों को धारण करने वाले श्री भगवान को वहीं नारी गोवर्धनधारी को कुचों के अग्रभाग पर धरण करती है।
  • अब आप स्‍वयं ही सोचिए कि यदि तीनों लोकों के मालिक को नारी अपने जाल में फॉंस सकती है, तो साधारण प्राणी का क्‍या हाल होगा।
  • नारी ईश्‍वर से अधिक शक्तिशाली और बोझ उठाने वाली है।
  • मैंने इस संसार के बन्‍धनों से मुक्‍त होने के लिए न तो भगवान की पूजा की और न ही औरत के इस कोमल शरीर का आनन्‍द लिया।
  • मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि मैंने अपनी मॉं की दी हुई जवानी को किसी तेज धार के कुल्‍हाड़े से काट डाला।
  • मनुष्‍य को इस संसार में रहकर कुछ करते रहना चाहिए। यहॉं माया जाल रूपी दुनिया है। इसलिए अपने आपकों पापों से बचाने के लिए, भगवान की पूजा करनी चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो नारी से प्रेम करना चाहिए।
  • केवल प्रेम और योनांगों के आनन्‍द में एक लम्‍बा फांसला होता है। यदि आप औरत का आनन्‍द लेना चाहते है तो प्‍यार करना सीखो।
  • जीवन के इस लम्‍बे सफर में यह सोचकर चलें कि कभी भी आप पर बुरा समय आ सकता है, इसलिए ऐसे समय के लिए थोड़ा बहुत धन अवश्‍य बचाकर रखना चाहिए। जब भी कभी इंसान पर बुरा समय अता है तो उसके अपने भी पराए हो  जाते हैं। यदि धन उसके पास हो तो वह इस समय का मुकाबला कर सकता है।
  • नारी और धन दोनों ही कभी भी धोखा दे सकते है। इन दोनों के बारे में सदा होशियार रहें।
  • लड़की यदि अच्‍छे खानदान की हो भले सुन्‍दर न हो तो शादी उसी से करनी चाहिए। शादी वही करें जो लोग अपने बराबर के हों।
  • पुरूष की तुलना में नारी का आहार दो गुना, शर्म चार गुनी, साहस छ: गुना और कामवासना आठ गुनी अधिक होती है।
  • नारी पुरूष की अपेक्षा कहीं अधिक कोमल होती है, किन्‍तु वह पुरूष से अधिक भोजन करती है। इसी कारण उसमें वासना की आग पुरूष से अधिक होती है। नारी फल भी और पत्‍थर भी।
  • राजा पत्‍नी, गुरू-पत्‍नी और सास माता के समान होती है। इसलिए इनको बुरी नजर से नहीं देखना चाहिए। इनको मॉं के समान ही आदर करना चाहिए। ऐसा न करने वाले महापापी कलंकी होते हैं उन लोगों की तो छाया से भी बचना चाहिए।
  • इस संसार में बन्‍धन तो बहुत है। किन्‍तु प्‍यार से बड़ा बन्‍धन और कोई नहीं। लकड़ी में सुराख करने वाला औजार कमल के फूल में सुराख नहीं कर सकता।
  • इसी तरह औरत प्‍यार करने वाला बन्‍धन अत्‍यन्‍त शक्तिशाली होता है, जैसे फूलों का सहारा रस चूस लेने वाला भंवरा लकड़ी में सुराख नहीं कर सकता। वह भंवरा फूलों की पंखडि़यों का हृदय बहुत आराम से चीरकर रस चखने पहुँच जाता है। क्‍योंकि उसे वहॉं पर प्‍यार मिलता है। इसलिए यह बात पूर्ण रूप से स्‍पष्‍ट हो जाती है कि प्‍यार से ही इस संसार को जीता जा सकता है।
  • जो पागल यह समझते है कि कोई सुन्‍दर लड़ी उनके प्‍यार के जाल में फँस गई है। ऐसे लोग प्रेम जाल में अंधे होकर बन्‍दर की भॉंति उसके इशारों पर नाचा करते है।
  • जो औरत दूसरों से प्‍यार करती है। दूसरों की ओर देखती है उस औरत का प्‍यार कभी भी धोखा दे सकता है। ऐसी औरत से सदा दूर रहना चाहिए। क्‍योंकि वे किसी एक की होकर नहीं रह सकती।
  • जो नारी अपने पति का कहना नहीं मानती, और फिर व्रत रखती है, ऐसी नारियॉं अपने पति की आयु कम करती हैं, इसलिए ऐसी नारियों को यह सोचना चाहिए कि पति की आज्ञा के बिना चलना उनके लिए कभी भी लाभदायक नहीं हो सकता।
  • स्‍त्री न तो दान देकर और न ही तीर्थयात्रा करके पवित्र हो सकती है। पाप करने से पूर्व उन्‍हें यह सोच लेना चाहिए कि यह कभी भी नहीं धुलता। नारी जब भी कभी स्‍वर्ग की आशा करती है तो उसे ये सोच लेना चाहिए कि उसका यह स्‍वर्ग केवल पति की सेवा से ही प्राप्‍त हो सकता है।
  • झूठ, बेईमानी, धोखा, फरेब, छल, कपट और क्रोध औरत के सबसे बड़े दोष माने जाते हैं।
  • यदि कोई नारी इनमें से किसी एक का भी शिकार हो जाती है तो इसमें हैरान होने जैसी कोई बात नहीं ऐसा हो जाना स्‍वाभाविक है।
  • वह नारी उत्‍तम मानी जाती है जो पवित्र हो, चालाकहो पतिव्रत हो। जो अपने पति से प्रेम करती हो, सत्‍य बोलती हो, ऐसे गुणों वाली और जिस घर में भी होगी वह घर सदा सुख के झूलों से झूलेगा। उस घर में खुशियॉं ही खुशियॉं होंगी। उसी घर को भाग्‍यशाली घर कहा जा सकता है।
  • इस संसार का हर प्राणी औरत को पालने की आशा करता है। यहॉं तक कि बड़े-बड़े विद्वान, महापण्डित, ज्ञानी देवता, आखिर यह सब क्‍यों होता है। यह आपने कभी सोचा।
  • इस संसार की सबसे बड़ी शक्ति कौन सी है।
  • क्‍या आप कल्‍पना कर सकते हैं कि इस संसार को जीत लेने वाला पुरूष उस शक्ति के आगे ऐसे पिघल जाता है जैसे आग के सामने मोम।
  1. वह शक्ति-नारी की जवानी और सुन्‍दरता।
  2. अत्‍यन्‍त सुन्‍दर औरत का शरीर क्‍या है।
  3. मॉंस, हाड़ और उसके यौवनांग।
  • पुरूष सत्‍य यह है कि यही सबसे बड़ा नर्क है आप इससे जितना भी बचकर रहेंगे, उतना ही लाभ होगा।
  • औरत कितनी भी बड़ी हो जाए, किन्‍तु यह अपने को सदा सुन्‍दर और जवान ही समझती रहती है। उसकी यही इच्‍छा होती है कि वह सदा जवान रहें ताकि पुरूष उसके पीछे-पीछे घूमता रहे।
  • औरत के चेहरे की सुन्‍दरता और उसके शरीर की बनावट पर ही तो पुरूष मरता हैं यही कारण है कि वह एक औरत के साथ रहते हुए भी किसी दूसरी औरत को बुरी नजरों से देखता है।
  • मासिक धर्म के पश्‍चात नारी कुंवारी लड़की जैसी ही पवित्र हो जाती है। पुरूष को यह सलाह दी जाती है कि वह भूलकर भी मासिक धर्म के दिनों में औरत से सम्‍भोग न करें।
  • इस दुनिया में अधिकतर युद्ध, दुर्घटनाएँ केवल नारी के ही कारण हुई है। इसीलिए बुद्धिजीवी को यही सलाह दी जाती है कि ये औरत के इस माया जाल से दूर रहें।
  • जो नारी सुबह के समय अपने पति की सेवा, मॉं के समान करती है और दिन में बहन के समान प्‍यार करती है। और रात में वैश्‍या की भॉंति, उसे अपने शरीर का आनन्‍द दे उसे ही अच्‍छी और गुणवान पत्‍नी माना जाता है।
  • परिवार के झगड़ों के पीछे अधिकतर हाथ नारी का होता है। इसलिए बुद्धिमान पुरूषों को सोच लेना चाहिए कि केवल औरत के पीछे लड़ने झगड़ने का कोई लाभ नहीं।

यह थे नारी के बारेमें चाणक्‍य जी के विचार। इन थोड़े से शब्‍दों में महापण्डित चाणक्‍य ने औरतों के बारें में पूरा ज्ञान दे दिया है।

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