Chanakya Neeti On Knowledge In Hindi | चाणक्य नीति ज्ञान पर कथन

Chankya Neeti on KNOWLEDGE In Hindi

Chanakya Neeti On Knowledge In Hindi | चाणक्य नीति : ज्ञान पर कथन

Chanakya Neeti On Knowledge In Hindi : आज हम आपसे Chankya Neeti में Knowledge [ज्ञान] पर कहे गए सभी श्लोंको का hindi में अर्थ बतायेंगे | Chankya के बताये गए ये नियम आपके लिए रामबाण सिद्ध होंगे |

Hy Friends , आज हम आपसे Chanakya Neeti को Hindi Language में Share करने जा रहे हैं | Chankya ने अपनी Chankya Neeti में Love, [Dushman],Student,Life,Woman,Dharma,Knoweldge आदि Topics को बहुत ही अच्छी प्रकार से हमें बताने की कोशिश की है , अगर हम चाणक्य की नीतियों का पालन करे तो हमारे सफल होने की सम्भावना बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है , क्योंकि इन्ही नीतियों के कारण चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद को पराजित किया था | चाणक्य ने इन नीतियों का संस्कृत भाषा ने वर्णन किया है जिसका HINDI रूपान्तरण हम यहाँ आपको उपलब्ध करा रहे हैं तो चलिए पढ़ते हैं :Chanakya Neeti Knowledge In Hindi

Chanakya Neeti In Hindi : Knowledge

  • हमारे दैनिक जीवन बड़ा विचित्र-सा है। ऐसा प्रतीत होता है कि हम प्रकाश में रहते हुए भी अन्‍धेरों में भटक रहे हैं।
  • इसका कारण केवल हमारी अज्ञानता है।
  • ज्ञान ही जीवन का पथ प्रदर्शक है, ज्ञान ही प्रकाश है।
  • ज्ञान से मुक्ति प्राप्‍त होती है।

चाणक्‍य जी ने इस संसार को निकट से देखते हुए हमारे जीवन के बारे में बड़ी गंभीरता से सोचा। इसे हम चाणक्‍य जी की बहुत बड़ी देन मानते हैं।

अब पेश है कुछ ज्ञान की बातें।

  • बुरे समय के लिए बचत करना जरूरी है यह मत भूलों कि अच्‍छा समय सदा नहीं रहता है जैसा अंधेरा प्रकाश में बदलता है वैसे ही समय है।
  • लक्ष्‍मी चंचल और रमणी है। यह एक स्‍थान पर कभी नहीं रुकती।
  • जिस देश में आदर नहीं, जीने के  साधन नहीं, विद्या प्राप्‍त करने के स्‍थान नहीं, वहॉं पर रहने का कोई लाभ नहीं। क्‍योंकि वहाँ पर व्‍यक्ति उन्‍नति नहीं कर सकता।
  • जहॉं पर अमीर लोग, वेदों के पाठ करने वाले पण्डित, दयालु राजा न हो, बीमार होने पर दवा-दारू का प्रबन्‍ध न हों, वहाँ पर रहना बेकार है।
  • मित्रता उस स्‍थान के लोगों से की जाए जहॉं पर डर, शर्म, चतुरता, त्‍याग जैसी आदतें अवश्‍य हों, अन्‍यथा उस देश अथवा उन लोगों के पस रहना भी उचित नहीं होगा।
  • यदि जहर में अमृत मिला हो तो हँसी-खुशी से पी लेना चाहिए।
  • सोना यदि किसी गन्‍दी जगह पर पड़ा हो तो उसे उठा लेना चाहिए।
  • शिक्षा यदि किसी घटिया प्राणी से भी मिले तो लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
  • यदि किसी दुष्‍ट वंश में बुद्धिमान कन्‍या हो तो उससे शादी कर लेना चाहिए। गुण ही सबसे बड़ी विशेषता है।
  • लड़की की शादी सदा अच्‍छे घर में करनी चाहिए। बेटे को शिक्षा अवश्‍य दिलवानी चाहिए। यदि शत्रु सदा उलझन में फँसा रहे तो अच्‍छा होता है।
  • मित्र को सदा धार्मिक ज्ञान देते रहना उचित है। समय के अनुसार ही अपने जीवन मार्ग को खोजना चाहिए।
  • पागल बुद्धिहीन आदमी से सदा दूर रहो। ऐसे लोग पशु समान होते हैं। बुरी संगत से दूर रहो, अज्ञानी को पास न आने दो।
  • अपने दिल की गुप्‍त बातें किसी को न बताओ मन का भेद दूसरों को देने वाले लोग सदा ही धोखा खाते है।
  • परिश्रम करने से इंसान की गरीबी दूर हो जाती है, पूजा करने से पाप दूर हो जाते है, जागते आदमी को डर नहीं लगता, यदि दो प्राणी झगड़ पड़े तो उनमें से एक खामोश हो जाए तो झगड़ा मिट जाता है।
  • जिस जगह झगड़ा हो रहा हो, वहॉं पर कभी भी खड़े नहीं होना चाहिए, कई बार ऐसे झगड़ों में बेगुनाह भी मारे जाते है।
  • यदि भयंकर अकाल पड़ जाए तो ऐसे अवसर पर किसी बदमाश से ही मित्रता करने में लाभ होता है क्‍योंकि बदमाश अपनी ताकत के बल बूते पर कहीं न कहीं से खाना ले आयेगा इस खाने को वह अपने मित्र को भी अवश्‍य ही खिलाएगा।
  • पुत्र, मित्र और परिवार के अन्‍य लोग अक्‍सर अपने से दूर हो जाते हैं अच्‍छे लोगों के साथ रहने में ही लाभ है। पुत्र वंश का नाम रोशन करते हैं।
  • हर प्राणी को पहले से ही सोचना चाहिए कि वह कौन सा पाप कर रहा है।
  • पाप और पुण्‍य में क्‍या अन्‍तर होते हैं।
  • मेरे मित्र कौन हैं, शत्रु कौन है। मुझे किस कार्य में लाभ हो सकता है किसमें हानि।
  • यहीं सोंचकर उसे जीवन का हर पग उठाना चाहिए।
  • हर प्राणी को चाहिए कि वह यथार्थ का सहारा ले केवल कल्‍पना के समय बुरे परिणामों को सोचकर अपना खून न जलाता रहे।
  • जीवन में कोई खतरे को देखकर डरना नहीं चाहिए।
  • अमीर आदमी को ही इच्‍छा और गुणवान माना जाता है। धन की पूजा सदा से ही होती रही है, इसलिए धन तो पास होना चाहिए धन पास हो तो शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।
  • शेर से एक, बगुले से चार, कौए से पॉंच, कुत्‍ते से छ: और बाघ से तीन गुण सीखने चाहिए।
  • काम भले ही थोड़ा करो, किन्‍तु मन लगाकर करना चाहिए। इंसान को यह शेर से सीखना चाहिए।
  • मित्रों की इन्द्रियों को संयम करना, समय के अनुसार अपनी शक्ति से काम करने का गुण बगुले से सीखना चाहिए।
  • ठीक समय से जागना, सोना, लड़ना, बन्‍धुओं को जगा देना, झपटकर भोजन खाना, यह गुण मुर्गें से सीखना चाहिए।
  • संकोच से मैथुन करना, समय-समय पर संग्रह करना, चौकस रहना, पर विश्‍वास न करना, यह पाँचों गुण कौए से सीखने चाहिए।
  • बहुत भूख में भी सन्‍तुष्‍ट रहना, गहरी नींद में सोते हुए भी जाग जाना, मालिक की वफादारी और बहादुरी, यह सब गुण कुत्‍ते से सीखने चाहिए।
  • बहुत थक जाने पर भी बोझ ढ़ोते रहना, रूखी-सूखी घास चर कर ही मालिक और भगवान का धन्‍यवाद करना, यह सब गुण गधे से सीखने चाहिए।
  • ऊपर वाले गुण सीखने  वाला प्राणी सदा सुख पाता है।
  • कोई भी काम आरम्‍भ करने के पश्‍चात उससे घबराना नहीं चाहिए, न ही उसे बीच में छोड़ना चाहिए। काम तो मानव की सबसे बड़ी पूजा का दूसरा नाम है। जो प्राणी मन से अपना काम करते हैं, वे सदा सुखी रहते है।
  • यदि धन का नाश हो जाए, मन की शान्ति भंग हो जाए,  औरत के चरित्रहीन होने का संदेह आग लगा रहा हो, इन सब बातों को बुद्धिमान लोग दूसरों को नहीं बताते। जो व्‍यक्ति ऐसा करने की भूल करते हैं उनका लोग मजाक उड़ायेंगे।
  • धर्म के लेन-देन और व्‍यापार के हिसाब। विद्या एवं साहित्‍य के संग्रम में। खानेपीने के व्‍यवहार में जो लोग संकोच नहीं करते वे सदा सुखी रहते हैं।
  • सन्‍तोष और धैर्य से जो सुख प्राप्‍त हो सकता है वह किसी और  चीज से नहीं। सन्‍तोष, धैर्य, शान्ति का मूल है। धन के लालच में अन्‍धे होकर मन को जो अशान्ति मिलती है, कष्‍ट होते है वे सब धैर्य और शान्ति से दूर हो जाते है।
  • पत्‍नी जैसी भी हो, धन जितना भी हो, भोजन जैसा भी हो, यह सब यदि समय पर मिल जायें तो सबसे अच्‍छा है। यह सब पा लेने के पश्‍चात् उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि उसका एक और कर्तव्‍य भी है, वह है विद्या प्राप्‍त करना।
  • पहले अपने साधारण शत्रु से अनुकूल व्‍यवहार करना चाहिए। भयंकर शत्रु को ताकत से कुचल देना चाहिए। जिससे अपनी जान को खतरा हो, उसे कभी माफ नहीं करना चाहिए। उसे नष्‍ट करने में ही लाभ होता है।
  • बहुत भले बनकर जीवन नहीं काटा जा सकता। भले और सीधे आदमी को हर एक दबा लेता है। उसकी शराफत और ईमानदारी को लोग पागलपन समझते हैं। जैसे जंगल में सीधे पेड़ों को पहले काटा जाता है, टेढ़े-मेढ़े पेड़ों को लोग कम ही छेड़ते हैं। इसलिए आप इतने सीधे मत बनिए कि लोग लूट कर ही खा जाएँ।
  • हंस केवल वहीं पर रहते हैं, जहॉं पर उन्‍हें पानी मिलता है। सरोवर सूख जाने पर वह अपनी जगह बदल देते हैं किन्‍तु प्राणी को ऐसा स्‍वार्थी न होना चाहिए। उसे बार-बार अपना स्‍थान नहीं बदलना चाहिए।
  • सारी देशी दवाओं में गूर्च श्रेष्‍ठ माना जाता है। विश्‍व के जितने भी सुख है, उनमें सबसे अधिक सुख का साधन भोजन को माना जाता है।
  • आँखे प्राणी के लिए सबसे कीमती अंग है। इनके अन्‍दर मस्तिष्‍क का निवास होता है, इसलिए उसकी विशेषता से इंकार नहीं किया जाता है। अपने हाथों से किया काम सबसे श्रेष्‍ठ होता है। मनुष्‍य को हर काम अपने हाथों से करना चाहिए।
  • ईख, तिल, चन्‍दन, दीर्लपान इनको जितना भी रगड़ा जाए उतना ही अच्‍छा होता है।
  • अनाज से दस गुना आटे में, आटे से दस गुना दूध में, दुध से आठ गुना मॉंस में और मॉंस से दस गुना शक्ति घी में होता है।
  • चिंता करने से रोग बढ़ते हैं, दूध पीने से शरीर बढ़ता है, घी से वीर्य बनता है, मॉस खाने से माँस बढ़ता है। यह प्रकृति की ही देन है।
  • अपने परिवार के बाकी लोगों के साथ प्‍यार का व्‍यवहार करें। सबके साथ सदा मीठे बोल बोलें, बदमाशों के साथ कड़ाई से पेश आयें।
  • भले और विद्वान लोगों से मेल रखे, जरूरत पड़ने पर औरत से छल करने वाले अन्‍त में कष्‍ट पाते हैं।
  • अंधाधुन्‍ध खर्च करने वाले, जो अपनी आमदनी से अधिक खर्च करते है और दूसरों से बेमतलब झगड़ा करने वाले लोग भी सुखी नहीं रह सकते।
  • जो लोग लेन-देन, पढ़ाई पर हर प्राणी से खुलकर बात नहीं करते हैं। वे सदा आनन्‍द से रहते हैं।
  • प्राणी को यदि मुक्ति प्राप्‍त करनी हो तो उसे झूठ बन्‍धनों को तोड़ना होगा और अपने मन का सहारा लेना होगा।
  • मनुष्‍य के लिए शान्ति का एक मात्र मार्ग केवल उसका मन है।
  • जैसे धरती खोदने से उसमें से पानी निकलता है। वैसे ही गुरू की सेवा करने से विद्या प्राप्‍त होती है। यह बात सदा याद रखें कि गुरू की सेवा के बिना इंसान कभी अच्‍छी शिक्षा नहीं पा सकता।
  • सदा दूसरों का भला करो। स्‍वार्थ से दूर रहो। दूसरों का भला करने वालों का भला स्‍वयं भगवान करते है। ऐसे लोगों को सुख-दुख के साथ भगवान होते हैं।
  • एक महान वृक्ष रूपी संसार के दो ही रूप हैं-
  1. अच्‍छी–अच्‍छी बाते
  2. गुणवान महान लोगों की संगत

इसलिए प्राणी को सदा इन दो रूपों को सामने रखकर ही अपना जीवन व्‍यतीत करना चाहिए। इन मार्गो पर चलकर सफलता मिलेगी।

  • जीवन और मृत्‍यु का चक्र तो सदा से ही चलता रहा है। आत्‍मा अमर है वह केवल अपना शरीर बदलती है। मनुष्‍य का जीवन यही आत्‍मा है।
  • आत्‍मा के साथ परमात्‍मा है। मनुष्‍य हर शरीर के साथ ही अपने जन्‍म के कर्मो का फल पाता है।
  • बिना पढ़े पुस्‍तक को अपने पास रखना। अपना कमाया धन दूसरों के हवाले करना। यह अच्‍छी बातें नही। इनसे दूर रहने में ही लाभ है।
  • जीवन, धर्म त्‍याग से मिलेगा।
  • दुश्‍मन की शरण में जाने से धन मिले।
  • ऐसे धन से आदमी निर्धन अच्‍छा, ऐसे जीवन से मौत अच्‍छी।
  • पाप और अत्‍याचारों से कमाया धन, अधिक से अधिक‍ दस वर्ष तक पुरूष के साथ रहता है। इसके पश्‍चात ऐसा धन मूल सहित अपने आप नष्‍ट हो जाता है। इसीलिए पाप की कमाई से सदा दूर रहो।
  • जो ज्ञान देता है, वह गुरू है भले गुरू से मात्र एक अक्षर ही प्राप्‍त हो। अधर्म की कमाई से सदा दूर रहों।
  • धर्म, धन, अज्ञ, गुरू का ज्ञान, दवाइयॉं आदि का सदा संग्रह करके रखना चाहिए।
  • ऐसी सब चीजें समय आने पर इंसान के काम आती हैं।
  • कोई भी काम आरम्‍भ करने से पहले दो प्रश्‍न करने चाहिए-
  1. यह काम क्‍यों कर रहा हूँ।
  2. इसका क्‍या फल मिलेगा।

इस प्रश्‍नों का उत्‍तर गंभीरता से अपने मन में ढूंढने का प्रयत्‍न करें। इसके पश्‍चात् ही काम आरम्‍भ करें।

  • शक्तिशाली शत्रु, कमजोर मित्र सदा नुकसान देते हैं। क्‍योंकि कमजोर मित्र कभी भी विश्‍वासघात कर सकता है। परन्‍तु शत्रु से आदमी स्‍वयं होशियार रहता है।
  • इस संसार में यदि आप किसी चीज पर सम्‍पूर्ण रूप से विश्‍वास कर सकते हैं तो वह केवल आपका मन है जो लोग अपने मन की आवाज सुनकर चलते हैं वे सदा सुखी रहते हैं।

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