Bol Na Yahya Lyrics In Hindi : Yahya Bootwala

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Bol Na Yahya Lyrics In Hindi : Yahya Bootwala :- Hy Friends , आज मै आपको Yahya Bootwala की Bol Na Yahya Lyrics Share कर रहा हूँ , इसे अब तक 3 Million लोग देख चुके हैं ………

बोल ना : याया बूटवाला लिरिक्स 

तेरी गलियों से मेरा गुज़रना क्या कम हुआ, सीढ़ियो पे बैठे तेरे आशिक़ का इंतज़ार मुकम्मल सा हो गया..

पर कुछ सवाल हैं तुझसे,

क्या तेरी पेशानगी शिकंजो को उसके होठ  वैसे ही सहला देते हैं जैसे मेरे होठ सहलाया करते थे..

क्या उसकी पास आती सांसो की गर्मी तेरे दिल की धड़कन वैसे ही बढ़ा देती हैं जैसे मेरी साँसे बढ़ाया करती थी..

क्या सर्द रातो मे तू आज भी कंबल छुपा देती हैं ताके लिपटने का एक और बहाना मिल जाए..

क्या शबाब के नशे मे आज भी गुम होकर तू उसको अपने सारे राज़ बता देती हैं और फिर होश मे आके वही बाते दोहरा देती हैं जैसे मेरे सामने दोहराया करती थी..

बोल ना..

क्या तू आज भी अपनी ज़ुल्फो को अपने गालो से फिसलने देती हैं ताके वो उंगलियो से उसे फिर से पीछे कर सके जैसे मैं किया करता था..

क्या वो भी तेरी आखो मे आखे डाल कर शामों को राते कर देता हैं जैसे मैं किया करता था..

क्या उसे भी दिखा दी वो सारी तस्वीरे जिसमे तू आज भी अपना बचपन खोजती हैं..

क्या उसे भी बता दी वो सारी बाते जो तूने मुझे ये कह के बताई थी के आज तक किसी को नहीं बताया था ..

बोल ना..!!

चल इन सब सवालो का जवाब मत दे,

बस एक सवाल का जवाब दे, के क्या तू भूल गयी वो रात जब क़मरे मे सिर्फ़ हम थे, मैने तुझे क़सके पकड़ा था और तेरे कंधे पे सिर झुका के तेरे कानो मे हल्के से मैने ये कहा था की “कभी छोड़ना मत”, और तूने कहा था “कभी नही”.

बोल ना..!!

Bol Na Yahya Lyrics In Hindi : Yahya Bootwala (Hinglish)

Teri galiyon se mera guzarna kya kam hua, sidhiyo pe baithe tere aashique ka intazar mukammal sa ho gaya..

Par kuch sawal hain tujhse,

kya teri peshani ki shikanjo ko uske hoth waise hi sehla dete hain jaise mere hoth sehlaya karte the..

kya uski paas ati saanso ki garmi tere dil ki dhadkan waise hi badha deti hain jaise meri saanse badhaya karti thi..

kya sard raato me tu aaj bhi kambal chhupa deti hain taake lipatne ka ek aur bahana mil jaaye..

kya shabab ke nashe me aaj bhi gum hokar tu usko apne saare raaz bata deti hain aur fir hosh me aake wahi baate dohra deti hain jaise mere saamne dohraya karti thi..

Bol naa..

kya tu aaj bhi apni zulfo ko apne gaalo se fisalne deti hain taake wo ungaliyo se use phir se pichhe kar sake jaise main kiya karta tha..

kya wo bhi teri aakho me aakhe daal kar shaamo ko raate kar deta hain jaise main kiya karta tha..

kya use bhi dikha di wo saari taswire jisme tu aaj bhi apna bachpan khojti hain..

kya use bhi bata di wo saari baate jo tune mujhe ye kehke batayi thi ke aaj tak kisiko nahu bataya..

Bol naa..!!

chal in sab sawalo ka jawab mat de bas ek sawal ka jawab de, ke kya tu bhul gayi wo raat jab qamre me sirf hum the, maine tujhe qaske pakda tha aur tere kandhe pe sir zuka ke tere kaano me halke se maine ye kaha tha ki “kabhi chodna mat”, aur tune kaha tha “kabhi nahi”.

Bol naa..!!

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