Bhagat Singh Biography in Hindi : Wikipedia | भगत सिंह की जीवनी

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Bhagat Singh Biography in Hindi : Wikipedia | भगत सिंह की जीवनी

Hi Friends क्‍या आपने कभी सोचा है कि हमें आजादी किसने दिलाई। हमारे भारत देश में कई वर्षो पहले अंग्रेजो का शासन था। भारत देश अंग्रेजो का गुलाम था। भारत देश में अग्रेजों (ब्रिटिश साम्राज्‍य) के नियम कानून चलते थे। भारत को आजाद करवाने में महान क्रान्तिकारियों का हाथ है। जिन्‍होनें आपनी जान की परवाह न करते हुए हमें आजादी दिलाई। तो चलिए आज मैं आपको ऐसे ही युवा महान क्रान्तिकारी सरदार भगत सिंह की जीवनी भगत सिंह की जीवन-परिचय के बारे मे पूरी जानकारी मिलेगी।

भगत की जीवनी

भगत सिंह का जन्‍म 27 सितम्‍बर 1907 को गांव बंगा जिला लायलपुर पंजाब में (जो बटँवारे के बाद पाकिस्‍तान में हैं) हुआ था। भगत सिंह की माता का नाम विद्यावती कौर और पिता का नाम सरदार किशन सिहं था। भगत सिंह जट्ट सिक्‍ख परिवार से थे। भगत सिंह की मॉं उन्‍हें बचपन में कई महापुरूषों की कहानियॉं सुनाया करती थी। भगत सिंह के पिता और चाचा अजीत सिंह स्‍वतन्‍त्रता सेनानी थे उन्‍हीं से प्र‍ेरित होकर बालक भगत सिंह आगे चलकर शहीद भगत सिंह बना। भगत सिंह के जन्‍म के समय उनके पिता किशन सिंह जेल मे थे, और उनके चाचा भी कई बार जेल जा चुके थे। भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह भारतीय देशभक्ति एसोसिएशन चलाई थी। भगत सिंह की प्रारम्भि‍क शिक्षा दयानन्‍द एग्‍लो वैदिक हाईस्‍कूल में हुई। फिर उन्‍होनें नेशनल कॉलेज लाहौर में आगे की पढ़ाई की। बचपन से ही उनके अन्‍दर देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाह थी। उनके पॉंच भाई ओर तीन बहनें थी। जिनके नाम रणबीर कुलतार, राजिन्‍दर, कुलबीर जगत और शकुंतला कौर। जब वे लाहौर के नेशनल कॉलेज मे पढ़ रहे थे, तभी अंग्रेजो के क्रूर व्‍यवहार से देश को बचाने के लिए “नौजवान भारतसभा” की स्‍थापना की। भगत सिंह अपनी मातृभूमि को अग्रेजो के चंगुल से छुड़ाना चाहते थें।

काकोरी काण्‍ड में रामप्रसाद बिस्मिल तथा कई क्रान्तिकारी को फांसी की सजा सुनकर उनका मन अत्‍यन्‍त दुखी हुआ और वे चन्‍द्र शेखर आजाद की हिन्‍दुस्‍तान रिपब्लिकन एसोसिएशन पार्टी से हाथ मिला लिया और इस पार्टी का नाम बदलकर “हिन्‍दुस्‍तान सोशलिस्‍ट रिपब्लिकन एसोसिएशन” रखा।

भगतसिंह ने इस पार्टी में कई नौजवानों को रखा। जो देश के लिए कुछ भी कर सके, साथ ही साथ हर पीड़ा को झेल सके। भगत सिंह युवाओं को प्रोत्‍साहित करते थे। क्‍योंकि वे जानते थे कि युवाओं में बहुत शक्ति जोश होता है। वे भारत माता को आजाद करा सकते है। भगत सिंह को कई भाषाओं हिन्‍दी, उर्दू पंजाबी और अंग्रेजी, बाग्‍ला का ज्ञान था।

देशभक्त्‍िा आन्‍दोलन – (लाला लाजपतराय की मृत्‍यु)

सन् 1928 में साइमन कमीशन के विरोध मे पूरे देश में आक्रोशित प्रदर्शन हुआ। इसका नेतृत्‍व लाला लाजपत राय कर रहे थे। अंग्रेजो द्वारा लाठी चार्ज करने पर उनकी मृत्‍यु हो गई अब भगत सिंह ने ठान लिया कि लाला लाजपतराय की मृत्‍यु का बदला लेना है भगत सिंह ने लाठी चार्ज का आदेश देने वाले अंग्रेज पुलिस अफसर स्‍कॉर्ट को मारने की गुप्‍त योजना बनाने लगे। योजना को सकल करने का वक्‍त आ गया।

साण्‍डर्स की हत्‍या

17 दिसम्‍बर 1928 को सवा चार बजे साण्‍डर्स जैसे ही बाहर आया राजगुरू ने साण्‍डर्स के सर पर गोली मारी और फिर भगत सिंह ने 3-4 गोली मरी  और इस तरह उन्‍होनें लाला लाजपत राय की  मौत का बदला ले लिया ।

भगत सिंह कुछ ऐसा करना चाहते थे कि अंग्रेज और जन-जन तक यह संदेश पहुंचे कि हिन्‍दुस्‍तान के लोग जागरूक है और उनके द्वारा बनाये गई नीतियों की भलीभॉति समझते थे। भगत सिंह चाहते थे कि इस योजना में खून न बहें और उनकी आवाज अंग्रेजो के कानों तक पहुँच जाए। इस योजना को सफल करने के लिए भगत सिंह और बटुकेश्‍वर दत्‍त को चुना गया। 8 अप्रैल1929 को असेम्‍बली के बीचो बीच में जहॉं कोई अंग्रेज न था वहॉं बम फेंका पूरा असेम्‍बली हॉल धुए से भर गया। बम लगाने शुरू कर दिए। इन्‍कलाब जिन्‍दाबाद और अपने साथ लाये गये पर्चो को हवा में उछालकर फेंक दिये। भागत सिंह चाहते तो वे भाग सकते थे लेकिन वे देश के लिए खुशी-खुशी फाँसी पर चढना चाहते थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जेल में डाल दिया। जेल में उन्‍होने कई लेख लिखे जेल भगत सिंह ओर उनके साथियों ने कई दिनों तक भूख हड़ताल की भूख हड़ताल में उनके एस साथी यतीन्‍द्र नाथ दास शहीद हो गये। 7अक्‍टूबर 1930 को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरू तीनों को फाँसी की सजा सुनाई गई।

“जिन्‍दगी तो अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कन्‍धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते है”

23 मार्च 1931की शाम 7बजकर33 मिनट पर तीनों को फॉसी दे दी गई फाँसी पर जाते समय तीनों खुशी-खुशी गीत गा रहे थे।

मेरा रंग दे बसंती चोला मेरा रंग दे,मेरा रंग दे बसंती चोला। माय रंग दे बसंती चोला।

फाँसी के बाद अंग्रेजों ने इनके मृतशरीर के टुकड़े कर फिरोजपुर ले जा रह थे तथा वहॉं मृत शरीर के टुकड़ो पर मिट्टी का तेल को डालकर आग लगा दी। जब लोगों ने आग को लगते देखा तो वे उसके पास गये तो अंग्रेज डर कर लाशो को अधजले टुकड़ों को सतलुज नदी में फेंक दिया। गॉंव के लोगों ने अंगो को एकत्रित करके दाह संस्‍कार किया।

धन्‍य है ऐसे बीर जिन्‍होनेंं प्राण की परवाह किये बगैर हमे आजादी  दिलायी।

“करता हूँ भारत माता से गुजारिश कि तेरी भक्त्‍िा के सिवा कोई बंदगी न मिले हर जनम किले हिन्‍दुस्‍तान की पावन धरा पर या फिर कभी जिन्‍दगी न मिले।

प्र.1 भगत सिंह का जन्‍म कब और कहॉं हुआ

उत्‍तर. भगतसिंह का जन्‍म 28 सितम्‍बर1907को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था।

प्र.2 भगत सिंह के पिता का नाम क्‍या था।

उत्‍तर. भगत सिंह के पिता का नाम किेशन सिंह था।

प्र.3 भगत सिंह कितने भाई बहन थे।

उत्‍तर भगत सिंह के पाँच भाई और तीन बहनें थी।

प्र.4 भगत सि‍ह के चाचा का नाम क्‍या था।

उत्‍तर. भगत सिंह के चाचा का नाम अजीत सिंह था।

प्र.5 भगत सिंह की शिक्षा कहॉं से हुई |

उत्‍तर. भगत सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा दयानंद एग्‍लो वैदिक हाईस्‍कूल और बाद में लाहौर के नेशनल कॉलेज से स्‍नात्‍तक की पढाई पूरीकी।

प्र.6 भगत सिंह कौन थे ?

उत्तर. भगतसिंह एक क्रान्तिकारी थे।

प्र.7 भगत सिंह का सपना क्‍या है ?

उत्‍तर. भगत सिंह का सिर्फ एक सपना था आजादी।

प्र.8 भगत सिंह को किस घटना ने झकझोर दिया ?

उत्‍तर भगत सिंह को जलिया वाला बाग हत्‍याकांड ने झकझोर दिया।

प्र.९ भगत सिंह की जलियावाला बाग हत्‍याकांड के समय कितनी उम्र थी ?

उत्‍तर- भगत सिंह की जलिया बाग हत्‍याकांड के समय १२साल की उम्र थी।

प्र.१० भगत सिंह आस्तिक थे या नास्तिक ?

उत्‍तर- भगत सिंह नास्तिक थे। क्‍योकिं उन्‍होनें इस पर एक बुक लिखी।

प्र.११ भगत सिंह किस दल के प्रमुख क्रान्तिाकरी थे ?

उत्‍तर- भगत सिंह चन्‍द्रशेखर आजाद दल के प्रमुख क्रान्तिकारी थे।

प्र.१२ भगत सिंह ने अपनी पार्टी का नाम “नौजवान भारत सभा से बदलकर क्‍या रखा ?

उत्‍तर- भगत सिंह ने अपनी पार्टी का नाम नौजवान भारत सभा से “हिन्‍दुस्‍तान सोशलिस्‍ट रिपब्लिक एसोसिएशन रखा।

प्र.१३ भगत सिंह ने लाला लाजपात राय का मृत्‍यु का बदला कैसे लिया ?

उत्‍तर- भगत सिंह ने लाला लाजपात राय की मृत्‍यु का बदला साण्‍डर्स को गोली मारकर लिया।

प्र.१४ भगत सिंह ने किस क्रान्तिकारी के साथ असेम्‍बली में बम फेका ?

उत्‍तर- भगत सिंह ने असेम्‍बली में बम ८ अप्रैल १८२९ की फेका।

प्र.१५ भगत सिंह ने जेल ने कौन सा हड़ताल किया ?

उत्‍तर- भगत सिंह ने जेल मे भूख्‍ हड़ताल किया।

प्र.१६ भूख हड़ताल में किस क्रान्तिकारी की मृत्‍यु हो गई?

उत्‍तर- भूख हड़तालन में यतीन्‍द्रनाथ दास की मृत्‍यु हो गई।

प्र.१७ भगत सिंह के साथ किस दो क्रान्तिकारी को फॉंसी की सजा सुनाई थी?

उत्‍तर- भगत सिंह के साथ उनके दोनो साथी राजगुरू और समुदाय को फॉंसी मिली।

प्र.१८ भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव को कब फॉंसी दी गई ?

उत्‍तर- भगतसिह, राजगुरू, सुखदेव को 23 मार्च 1931को 7 बजकर 33 मिनट पर शाम को

फॉंसी दी गई।

प्र.१९ भगत सिंह किस उम्र में फॉसी दी गई?

उत्‍तर- भगत सिंह को 23 साल की उम्र में  फॉंसी दी गई।

भगत सिंह के विचार –

  • जिन्‍दगी तो अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कन्‍धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते है।
  • वे मुझे मार सकते है लेकिन वे मेरे विचारो काे नही मार सकते है मेरे शरीर को कुचल सकते है ले‍किन वे मेरी आत्‍मा को नहीं कुचल सकते।
  • जन संघर्षके लिए, अहिंसा आवश्‍यकत है।
  • राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान हे मैं एक ऐसा पागल हूँ  जो जेल में भी आजाद है।
  • मै महत्‍वाकांक्षा आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ पर मैं जरूरत पड़ने पर ये सब त्‍याग सकता हूँ और वही सच्‍चा बलिदान होगा।
  • जब व्‍यक्ति कोई कुछ काय्र करता है तब वो अपने काम को लेकर सुनि‍श्चित होता है जैसे कि मै विधान सभा में बम फेकने को लेकर था।
  • प्रेमी,पागल ओर कवि एक ही चीज से बने होते है।
  • यदि बहरो को सुनाना है तो आवाज को बहुत जोरदार करना होगा।
  • जो व्‍यक्ति भी विकास के लिए खड़ा है उसे हर रूढि़वादी चीज की आलोचना करनी होगी, अविश्‍वास करना होगा तथा उसे चुनौती देना होगा।

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