Amandeep Singh Poetry Lyrics : Pheli Nazar Main Pyaar [Friendship At First Sight]

0
362

Amandeep Singh Poetry Lyrics : Pheli Nazar Main Pyaar [Friendship At First Sight] :- आज हम आपसे Amandeep Singh की Love story Poem Pheli Nazar Main Pyaar Lyrics Share कर रहे हैं |

मै घर से इंजीनियर,

बनने निकला था |

वो किसी ने कहा,

इंजीनियरिंग कर लो|

बहुत स्कोप है,

मै बोला ठीक है,

चलो ये भी कर लेते है|

हालाकि science मै मुझे,

कभी कोई interest नहीं था|

hostel के पहले week में,

अपने चार दोस्तों को,

बैठाकर अपने दिल टूटने,

का किस्सा सुना रहा था|

कि अचानक वहां,

पाचवां शख्स आ गया|

हाथ में पिंक कलर की,

bottle पकडे हुये और,

pink colour की t-shirt,

पहन कर|

उस दिन के बाद मैंने उस,

लड़की के चक्कर काटने छोड़ दिए|

और हम दोबारा ,

फिर कभी नहीं मिले|

ये line ख़त्म करते ही,

जैसे मैंने पाचवे शख्स से,

एक आँखे मिलायी दूसरे,

पल वो मुझसे बोलने लगा|

और फिर आज भी हर रात,

तुम सोने से पहले,

एक बार उसकी प्रोफाइल,

पिक्चर देखते ज़रूर हो|

I had no clue,

उसे वो next line बिल्कुल इतनी,

precision से कैसे पता चली |

हम सब वहाँ खड़े रह कर,

कुछ दूर बाते करते रहे|

एक दूसरे को जाना पहचाना,

उसने अपना नाम अक्कू बताया|

हमें उस दिन भी नहीं पता था,

और आज भी समझ,

नहीं आता कि कैसे,

एक बस पल को,

एक दूसरे आँखों में,

देख कर समझ जाते है|

कि हम दोनों के दिमाग,

में क्या चल रहा है|

धीरे- धीरे हमारी,

दोस्ती बड़ी होती गई,

हमारी दोस्ती बढ़ती गई|

बिल्कुल किसी कमल,

के फूल की तरह,

उस कीचड़ जैसे,

collage में बढ़ती गयी|

collage मै घर से दूर,

एक भाई मिल गया था|

जो सोचता ,समझता

बिल्कुल मेरी तरह था|

वह कहते है न,

some one you can count on,

बिल्कुल वैसे वाली दोस्ती,

t-shirt से लेकर,

सपनो तक हमारी,

हर एक चीज़ एक दूसरे,

से बाटने लग गए थे|

उसके साथ हार भी,

जश्न से कम नहीं लगती|

करीब करीब सारे काम,

हम एक साथ करने लग गये थे|

पर हम कभी इस चीज,

का ध्यान नहीं रखते|

कि पर हम कभी  इस चीज का,

ध्यान नहीं रखते कि,

काम करते वक्त उस काम,

पर जो ध्यान देना चाहिए|

कितना important होता है|

तो बस यही मानना था,

कुछ गड़बड़ हो जाती है|

तो हम दोनों साथ मिलकर,

इसे सम्भाल तो लेगे ही और,

इस वजह से हमारे हर काम की,

शुरुआत ही गड़बड़ी से होती थी|

collage में किसी भी student की,

सबसे important ज़रुरत,

होती है 75 % attendence,

exam से पहले हम दोनों अपने साथ,

दो चार और लड़को को लेकर,

हर teacher की दर पर ले जाकर,

attendence की गुहार लगाते|

और उसने अपने हाथ,

में पेन लिया और हम,

teacher के chamber में चले गए|

पूरे 35 मिनट के बाद,

जब बाहर वापिस आये,

अपने साथ पूरी class,

का attendence हमने,

बढवा लिया था|

और साथ में ये proof,

भी किया कि,

जब एक engineer की,

convencing power इतनी,

ज्यादा हो सकती है|

कि हमारे देश की राजधानी,

का chief minister तक,

बन सकता है| तो भला,

ये attendence क्या चीज है|

उसके सामने ऐसे ही,

किस्सों के साथ कब,

third year आ गया|

दीवाली मेरा सबसे पसंदीदा त्यौहार है|

पर उस साल मेरे घर पर,

एक हादसा हो गया था|

जिसमे मैंने अपने परिवार के,

सदस्य को खो दिया था|

घर का माहौल कुछ ठीक नहीं था|

तो माँ ने मुझे घर आने,

से मना कर दिया,

सब घर चले गए थे,

पर मै अकेला hostel में था|

दीवाली से ठीक एक दिन,

पहले अक्कू का फ़ोन आता है|

और भाई सब बढ़िया,

मैंने कहा हाँ सब बढ़िया|

पर मै यहाँ अकेला  हूँ,

एक सन्नाटा सा रह गया|

हमारे बीच में चुप्पी,

तोड़ने के लिए मैंने कहा अच्छा,

ये बताओ घर पर सब कैसे है|

और आते वक्त मेरी पसंदीदा जो मिठाई होती है,

अलग से मेरे लिए पैक करवाके लाना,

मैंने फ़ोन रखा वापिस मूवी देखने लगा,

दिन बीता रात हुई और मै खाना खाकर सो गया|

अगले दिन दरवाजे की खडखडाहट,

से मेरी नीद खुलती है मुझे लगा बाई आई होगी|

room साफ़ करने के लिए,

पर जैसे दरवाजा खोला सामने,

अक्कू खड़ा था मुझे समझ नहीं आया कि,

मै उसे क्या बोलू कि तू पागल है,

भला मेरे लिए तुम घर पर से,

दीवाली के दिन सब कुछ,

छोड़ करके  क्यों आ गए|

उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा कहा,

और भाई सब बढ़िया,

उसी एक पल में मुझे समझ नही आया|

इसे मै डाॅँँट दुतकारूं या अपने आप पर हंसू,

कैसा दोस्‍त बना लिया है|

उस दिन मुझे दीवाली का सही मतलब पता चला।

उस दिन मुझे अहसास हुआ,

इतनी खुशी हुई होगी।

अयोध्‍या के लोगों को जब,

उन्‍होंने श्रीराम को वापस आते देखा होगा|

उस एक पल में मैं उस खुशी को जी रहा था|

जब मेरा पागल दोस्‍त बस,

इतना कहने पर कि मैं अकेला हूं।

तो सब कुछ छोड़कर दीवाली के सिवा,

मुझसे मिलने वापस आ गया था।

जि़न्‍दगी में दोस्‍ती की क्‍या,

अहमियत होती है यह उसने मुझे सिखाया।

जि़न्‍दगी के मोड़ पर हम किसी,

एक अंजान चेहरे से मिलते हैं|

और फिर आने वाली,

जो अन्‍जान जो जिन्‍दगी होती है|

उसमें वो  चेहरा हमारा सबसे,

शानदार साथी बन जाता है|

वो हमारा दोस्‍त बन जाता है|

कुछ लोग हमारी आदत को समझते है,

कुछ लोग मेरे हालात समझते है,

, कुछ लोग मेरे ज़स्‍बात समझते है,

पर वो एक दोस्‍त है,

जो मेरी हर बात समझता है।

जि़न्‍दगी के अपने ही,

कितने काले सफेद किस्‍से है।

अगर उस दोस्‍त का साथ हों,

तो मै सब कुछ हंस कर,

जी लूं बना लूं अपने ही अपने किस्‍से।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here