आतंकवाद और भारत : कारण , उपाय , परिणाम

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आतंकवाद और भारत : Aatankwaad / Terrorism Par Nibandh Hindi Me : भारत अहिंसा का पुजारी है| शांति से जीवनयापन करना ही यहाँ के लोगो का लक्ष्य रहा है! ‘जीओ और जीने दो’ का आदर्श ही उसका धर्म रहा है, लेकिन खेद का विषय यह है कि इस अहिंसक और शान्तिप्रिय देश मे पिछले कई दशको से सांप्रदायिक हिंसा और आतंकवाद का बोलबाला है| आतंकवाद की शुरुवात बंगाल मे नकसलवादियों द्वारा आरंभ की गयी| इसको आगे बढ़ाने का काम पंजाब मे खलिस्तान बनाने की मांग से हुआ| असंख्य बेगुनाहों का खून बहा| आज स्थिति यह है कि इसका स्वरूप इतना विस्तृत होता जा रहा है कि धीरे-धीरे समूचा भारत ही इसका शिकार हो रहा है| जन-जन मे आज भय समा गया है|

आतंकवाद और भारत : कारण , उपाय , परिणाम 

देश की स्थिति यह है कि देश के लोग ही इसे खोखला करने मे लीन है| बेरोजगारी से बचने के लिए धार्मिक-युद्ध ( जेहाद) का मुखौटा ओढ़कर आतंकवाद मे कदम रखने वाले युवा देश मे अशांति और अस्थिरता का माहौल फैलाकर अपनी विजय- पताका को ऊंचा करने मे लगे है| भारत मे कुछ इस्लामिक संगठनो एवं विदेशी आतंकवादियो द्वारा विस्फोटो, हत्यारो का सिलसिला आज भी जारी है| इन कारनामो को अंजाम देने के लिए आई.सी.सी.,  लश्कर ए तोयबा , उल्फ़ा जैसी संस्थाएं भारत की सुख-शांति को खत्म करना चाहती है| ऐसी राष्ट्र-विरोधी संस्थाएं विदेशी भी होती है और देशी भी होती है जिनका उद्देश्य राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक सभी दृष्टियों से देश मे उथल-पुथल, अस्थिरता एवं अराजकता उत्पन्न कर अपनी शर्तो पर पूरा करना होता है| कभी-कभी इन संस्थाओ मे हिंसा, शक्ति-प्रदर्शन एवं अपना वर्चस्व सिद्ध करने की होड़ सी लग जाती है जिसके फलस्वरूप ये घोर अमानवीय कृत्य जघन्यता एवं निर्दयतापूर्वक करने को विवश हो जाती है| संवेदनाओ से रहित इन आतंकवादी संस्थाओं के सदस्यों के हृदय घृणा, ईर्ष्या, द्वेष आदि के गरल से भरे हो जाती है| ये हिंसक बर्बर पशु से भी अधिक बर्बर एवं क्रूर हो जाते है|

आतंकवाद एक ऐसी सोच की उपज है जो यह सोचती है कि किसी भी देश, समुदाय, दल पर विजय पाने के लिए उसे अस्त्र शस्त्र द्वारा डरा धमका करके, किसी को मार करके अपना वर्चस्व कायम किया जा सकता है या अपनी बात मनवाई जा सकती है यह गैरकानूनी ढंग से सरकार को विफल करने का प्रयास करती है|

अपने निजी राजनीतिक स्वार्थो की पूर्ति के लिए विभिन्न बाह्य शक्तियाँ जब किसी राष्ट्र मे व्यापक स्तर पर जनता मे अपने भयानक कारनामो के द्वारा भय, असंतोष तथा असुरक्षा की भावना को फैला देती है, तब उस स्थिति को हम आतंकवाद कहते है| आतंकवाद, हिंसा, अपहरण, बलात्कार, आगजनी और बम-विस्फोटों तक ही सीमित नही रहता है बल्कि शत्रु-देश को आर्थिक रूप से अस्थिर करने हेतु जाली नोटों, सिक्कों का प्रचलन बाजार मे कर देते हैं , अफवाहें फैलाकर असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर देते हैं, नकली दवाएं धड़ल्ले से चलाते हैं तथा नवयुवकों को नशे का आदी बनाने के लिए स्मैक, हीरोइन, ब्लैक-शुगर आदि बेच कर धन भी कमाते हैं और अपने उद्देश्य की पूर्ति भी करते है|

भारत मे आतंकवाद हमले

यदि भारत मे हुये आतंकवाद की बर्बर घटनाओ का जिक्र करे तो आपको ये पोस्ट छोटी लगेगी| लेकिन फिर भी प्रमुAatankwaad / Terrorism ख आतंकवादी घटनाओ मे हमारे देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी, इन्दिरा गांधी, बॉम्बे बम ब्लास्ट, संसद हमला, अक्षरधाम मंदिर हमला, मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट (जिसमे 200 से ज्यादा बेकसूर मारे गए), 26 नवम्बर 2008 मे हुआ मुंबई अटैक और उरी अटैक जिसमे हमारे देश के वीर जवान मारे गए|

1993 बॉम्बे बम ब्लास्ट मे याक़ूब मेनॉन का प्रमुख हाथ था जिसके कारण उसे फाँसी दी गयी लेकिन इसका मास्टर माइंड दाऊद इब्राहिम अब भी पाकिस्तान मे आराम फरमा रहा है | इस ब्लास्ट मे कितने बेक़सूरों की जिंदगी को मौत के घाट उतार दिया जिनका दूर-दूर तक कोई कसूर नही था|बम विस्फोटों के बाद संभावित सांप्रदायिक दंगों के दौरान सुरक्षा के लिए दाऊद इब्राहिम के गिरोह ने इन हथियारों को कथित तौर पर मुंबई में संजय दत्त ने मदद की जिसके कारण संजय दत्त को 5 साल की सजा सुनाई गयी थी|

13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हमला कर दिया जिसमे सोर्स के अनुसार इसमे लश्कर ए तैयबा और जाइश ए मुहम्मद संगठनो का हाथ था| इसका मास्टर माइंड अफजल गुरु था जिसे 2013 मे तिहाड़ जेल मे फांसी दी गयी|

26 नवंबर और 27 नवंबर, 2008 मुंबई के लिए दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुए क्योंकि आतंकवादियों ने भारत की वित्तीय राजधानी के आठ स्थानों पर हमला किया था। ताज गेटवे, ओबेरॉय, सीएसटी टर्मिनस, सांता क्रूज़ हवाई अड्डे, कोलाबा और 2 अस्पताल ऐसे स्थान थे जहां पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा डरावनी और अमानवीय कृत्यों का शिकार हुआ था, जो लश्कर-ए-तैयबा द्वारा समर्थित आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा से जुड़े थे।

इस अमानवीय कृत्य मे 183 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी और 300 से ज्यादा घायल हो गए। अंततः भारतीय सेना, एनएसजी कमांडो और मुंबई पुलिस के संयुक्त अभियान में नौ आतंकवादियों मार गिराया। अजमल कसाब नामक एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ा गया था। बाद मे उसे फांसी दी गयी|

कश्मीर में एक सेना शिविर पर आत्मघाती हमले में आतंकवादियों ने 17 सेना के सैनिकों की मौत हो गई और 19 घायल हो गए। बारामुल्ला जिले में उरी में 12 वें ब्रिगेड के मुख्यालय के करीब चार आतंकवादियों ने शिविर पर हमला किया। यह हाल के दिनों में सुरक्षा बलों पर सबसे घातक आतंकवादी हमलों में से एक था|
परिप्रेक्ष्य में मौत की मौत को रोकने के लिए, जनवरी 2016 में पठानकोट आतंकवादी हमले में सात सैन्यकर्मी मारे गए थे। भारतीय वायुसेना के आधार पर  यह हमला तब से एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी  हमले की प्रमुख घटना बन गया है। पाकिस्तान ने इसे अंजाम दिया फिर भारत के प्रधानमंत्री ने इसका जवाब उन्ही की भाषा मे दिया और पाकिस्तान में एक सर्जिकल स्ट्राइक कर दी| सर्जिकल स्ट्राइक करने के बावजूद भी पाकिस्तान अब भी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और कश्मीर को भारत से अलग करने योजना बनाता रहता है| पाकिस्तान जम्मू कश्मीर के लोगो को तरह तरह के लालच देता है जिससे आए दिन वह देश विरोधी गतिविधियां होती रहती है जैसे नवजवानों द्वारा पत्थरबाजी और हमारे सैनिको पर हमला होता है|

ऐसा नही  इस बीमारी से भारत ही त्रस्त है| भारत के अलावा अन्य देश भी आतंकवाद से अछूते नही है |13 नवंबर 2015; जब पेरिस आतंकियों की गोलियों से थर्रा उठा था।  इस हमले में करीब 130 बेगुनाह लोग आतंकियों की दरिंदगी का शिकार बन गए थे। उस रात आतंकियों ने पेरिस में छह जगह खून की होली खेली थी। लेकिन उस रात का सबसे खौफनाक हमला था महज़ कुछ घंटों में नौ दहशतगर्दों ने इस हमले से दुनियाभर में कोहराम मचा दिया था। इस हमले में करीब 130 बेगुनाह लोग आतंकियों की दरिंदगी का शिकार बन गए थे। वो खौफनाक रात यहां के लोगों के जेहन में आज भी ताज़ा है। पाकिस्तान, सीरिया, उत्तरी कोरिया प्रमुख अड्डे बन गए है और ये मानवजाति का केवल विनाश चाहते है| आतंकवाद से किसी भी देश का भला नही हो सकता| कुछ देशो ने बंदूक, मशीन गन, परमाणु बम, हाइड्रोजन बम आदि बना लिए है| इन विध्वंसक अस्त्रों से आतंकियो की शक्ति बढ़ती है|

आतंकवाद के कारण :

  • बाह्य शक्तियों के प्रभाव
  • शिक्षा का अभाव
  • उचित पथ प्रदर्शन का अभाव
  • आजीविका की समस्या
  • दूसरों के बहकावे मे आना
  • नवजवानों की कुसंगति
  • प्रशासनिक अकुशलता
  • जनसंख्या वृद्धि
  • राजनीतिक कुचक्रों का परिणाम

आतंकवाद के इन करणों मे प्रमुख कारण तो शिक्षा का अभाव एवं आजीविका की समस्या है| बेरोजगार भूखा व्यक्ति और उस पर भी अशिक्षित बहुत जल्दी बरगलाया जा सकता हैं और पाप के कीचड़ मे धकेल दिया जा सकता है|

आतंकवाद के परिणाम :

  • दंगे-फसाद को बढ़ावा
  • सरकार के प्रति अविश्वास की भावना का उदय
  • असुरक्षा की भावना का उदय
  • राष्ट्रीय एकता मे बाधक
  • राष्ट्र की आर्थिक स्थिति असंतोषजनक|

इन सब स्थितियो के उदगम एवं मूल कारण को समझना और उनकी रोकथाम के कारगर उपायों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है| अभी परिस्थितियां बेकाबू नही हुई है, अतः प्राथमिकता के साथ इन पर कड़ी किन्तु सतर्क कार्यवाही करनी चाहिए अन्यथा आतंकवाद के कुपरिणामों से और भी भयंकर परिणाम होंगे| अँग्रेजी मे कहावत है: ‘A stich in time saves Nine’ अतः इन परिणामो के परिणामो के प्रति जागरूक और सक्रिय होना है|

आतंकवाद को रोकने के उपाय :

आतंकवाद से लड़ने का कोई नापाक तरीका अहिंसा का पुजारी हमारा देश अभी तक इजात नही कर पाया है| पिछले दस सालों से पंजाब, कश्मीर आतंकवाद की चपेट मे है लेकिन यह आतंकवाद किसी भी तरीके से संभल नही रहा है| आतंकवाद को दूर करने के लिए सरकार पुलिस, अर्द्ध-सैनिक बल, सेना, ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी कड़ी कार्यवाही भी कर चुकी है किन्तु आतंकवाद को रोकने मे पूर्णत: सफलता नही मिल सकी हैं| फिर भी हम कुछ उपायों को निम्न रूप से समझा सकते हैं, जैसे- उचित नैतिक शिक्षा, बाह्य शक्तियों का कठोरता से दमन, जनता मे जागरूकता की भावना पैदा करना, सीमाओं पर कठोर नियंत्रण, राजनीतिक एकता आदि|

आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए यह आवश्यक है की सरकार के प्रति जनता मे विश्वास जगा करके लोगो को सचेत रहना होगा और देश विरोधी  अराजक तत्वो से डटकर सामना करना होगा| इसके अतिरिक्त जहां एक ओर आतंकवादियों के साथ कठोर व्यवहार करना होगा, वही गुमराह युवको को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश भी करनी होगी|आतंकवाद से लड़ने के लिए विश्व स्तर पर भी प्रयास किए जाने चाहिए|

यह कैसी विडम्बना है की बुद्ध, गुरु नानक, महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों की जन्मभूमि पिछले कुछ दशको से सबसे अधिक अशांत और हिंसात्मक हो गयी है| अब तो ऐसा प्रतीत होता है की देश के करोड़ो नागरिकों ने हिंसा की सत्ता को स्वीकारते हुए उसे अपने दैनिक जीवन का अंग मान लिया है| भारत के विभिन्न भागो मे हो रही आतंकवादी गतिविधियो ने देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है| आतंकवाद का समूल नाश ही इस समस्या का समाधान है| हर साल आतंकवाद को खत्म करने के लिए 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है|

1 COMMENT

  1. Atankwad ke bare me bohot acche dhang se aapne bola hai, jaankari pa ke logon ka gyan barhega. acchi batein homno chahiye jiss se ko atankwad ko log bhuil jaen aur achhi batein yaad rakhen. Achhe prayas jaise entertainment, culture, audio vvideo sharing jaise http://www.hindi.media posts sab ke hit me hai aur sabko pasand bhi.
    Khel aur manoranjan sab ke liye hai aur iss se sabhi khush rehte hain. Umeed hai kik aap ke prayas se jo jankari mili iss se agay samhalkne me madad zarur milegi.

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